सर्वे: असंगठित क्षेत्र के 20 फीसदी श्रमिक अभी भी बेरोजगार, 61% मजदूर लॉकडाउन के दौरान हुए बेरोजगार

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देश में अभी भी असंगठित क्षेत्र के पांच में से एक श्रमिक बेरोजगार है। यानी करीब 20 फीसदी श्रमिकों के पास काम नहीं है। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की ओर से अक्तूबर-दिसंबर की अवधि के बीच किए गए सर्वे से यह जानकारी मिली है।

सर्वे के अनुसार, लॉकडाउन से पूर्व (फरवरी) में तीन फीसदी श्रमिक बेरोजगार थे और चार फीसदी श्रम बाजार से बाहर थे। वहीं, लॉकडाउन के दौरान 61 फीसदी मजदूर बेरोजगार और 10 फीसदी श्रम बाजार से बाहर हो गए। अगर लॉकडाउन के बाद की स्थिति देंखे तो 11 फीसदी श्रमिक अभी भी श्रम बाजार से बाहर और आठ फीसदी बेरोजगार हैं।

दो-तिहाई श्रमिक हुए थे बेरोजगार

सर्वे के अनुसार, फरवरी महीने के दौरान काम पर लगे मजदूर में से दो तिहाई (69%) का काम लॉकडाउन के दौरान छूट गया। वहीं, छह महीने के बाद अभी भी 20 फीसदी को काम नहीं मिला है। यानी उनको महीने में एक दिन भी काम नहीं मिला है। सर्वे में कहा गया है कि रोजगार मुहैया कराने में शहर पिछड़ गए हैं। शहरी भारत में 27% लोग अभी भी काम से बाहर हैं। वहीं, अक्तूबर-दिसंबर के दौरान ग्रामीण भारत में यह संख्या 14% थी।

अर्थव्यवस्था पूरी तरह नहीं उबरा

सर्वे में कहा गया है कि कोरोना संकट और लॉकडाउन के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है लेकिन अभी तक यह पूरी तरह नहीं सुधरा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिनको काम मिल गया है उनके आय में सुधार हुआ है लेकिन जिनको अभी तक काम नहीं मिला उनकी स्थिति दयनीय बनी हुई है। इसमें सबसे ज्यादा स्थिति महिलाओं की खराब है।

महामारी की चपेट में सबसे ज्यादा गरीब आए

सर्वे के मुताबिक महामारी की चपेट में सबसे ज्यादा गरीब आए हैं जो बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। ऐसा इसलिए कि कोरोना वायरस महामारी ने देश में हर तरह के काम को प्रभावित किया। लाखों कारखाने, छोटे उद्योग और बड़ी कंपनियों बंद होने से रोजगार का संकट पैदा हो गया। इससे उनकी आय बुरी तरह से प्रभावित हुई है। सर्वे में मजदूर एक महीने में एक दिन भी काम करने की सूचना देता है, तो श्रमिकों को नियोजित माना जाता है।

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