आज है सावन की हरियाली अमावस्‍या जानिए वृंदावन से आचार्य जी से इसका महत्‍व

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*सावन की हरियाली अमावस्‍या का महत्‍व*
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अमावस्या में श्रावण मास की अमावस्या का अपना अलग ही महत्व है। इसे हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हरियाली अमावस्या का त्योहार सावन महीने की अमावस्या को मनाया जाता है। यह त्योहर सावन में प्रकृति पर आई बहार की खुशी में मनाया जाता है। हरियाली अमावस पर पीपल के वृक्ष की पूजा एवं फेरे किये जाते है तथा मालपूए का भोग बनाकर चढाये जाने की परम्परा है। हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण का भी महत्व है।

इस वर्ष 08 अगस्त के दिन हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी अमावस्या के साथी ही यह पितृकार्येषु (पित्रो के लिए किए जाने वाले जप दान आदि) की अमावस्या के रुप में भी जानी जाती है. कालसर्प योग, ढैय्या तथा साढ़ेसाती सहित शनि संबंधी अनेक बाधाओं से मुक्ति पाने का यह दुर्लभ समय होता है।

*हरियाली अमावस्या के कर्म:-*
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हरियाली अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करके, उसके किनारे बैठकर किसी पंडित से पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, श्राद्धकर्म करवाया जाए तो पितरों को शांति मिलती है। यह कर्म करने के बाद पितरों के नाम से गरीबों को भोजन करवाएं, गाय को चारा खिलाएं, गरीबों को वस्त्र आदि भेंट करना चाहिए।

अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन दोपहर 12 बजे के पूर्व पीपल के पेड़ के पेड़ की 21 परिक्रमा करते हुए जल अर्पित करें। पीपल के पेड़ का पूजन कर मौली के 21 फेरे बांधें। शाम को सूर्यास्त से पूर्व पीपल के पेड़ के नीचे आटे से पांच दीपक बनाकर प्रज्जवलित करें। इससे धन संबंधी समस्या समाप्त होती है। ध्यान रहे यह प्रक्रिया सूर्यास्त के बाद बिलकुल न करें।

अमावस्या के दिन दृष्टिहीन, अपंग, मंदबुद्धि, लंगड़े या जिनका कोई अंग भंग हो गया हो, ऐसे लोगों को वस्त्र भोजन भेंट करें। इससे जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा होती है।

हरियाली अमावस्या की रात्रि में दीपदान का बड़ा महत्व है। इस दिन रात्रि में किसी नदी, तालाब में दीपदान करना चाहिए। इससे पितृदोष से मुक्ति मिलती है।

श्रावणी अमावस्या प्रकृति देवी की आराधना का पर्व है मान्यता है कि वृक्षों में देवी-देवताओं का वास होता है इसलिए इस दिन पौधा लगाना शुभ माना गया है।

*विशेष कामना सिद्धि हेतु उपाय:*
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1. लक्ष्मी प्राप्त के लिए : तुलसी, आँवला, केल, बिल्वपत्र का वृक्ष लगाये।

2. आरोग्य प्राप्त के लिए : ब्राह्मी, पलाश, अर्जुन, आँवला, सूरजमुखी, तुलसी लगाये।

3. सौभाग्य प्राप्त हेतु : अशोक, अर्जुन, नारियल, ब़ड (वट) का वृक्ष लगाये।

4. संतान प्राप्‍ति के लिए : पीपल, नीम, बिल्व, नागकेशर, गु़डहल, अश्वगन्धा को लगाये।

5. मेधा वृद्धि प्राप्त हेतु : आँक़डा, शंखपुष्पी, पलाश, ब्राह्मी, तुलसी लगाये।

6. सुख प्राप्त के लिए : नीम, कदम्ब, धनी छायादार वृक्ष लगाये।

7. आनन्द प्राप्त के लिए : हरसिंगार (पारिजात) रातरानी, मोगरा, गुलाब लगाये।

*राशि के अनुसार उपाय-:*
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मेष : लाल राईं या सरसों का तेल किसी गरीब को दान में दें। (राशि ग्रह मंगल अनुसार)- पारस पीपल, लाल चंदन, केशर का पौधा लगाए।

वृषभ : गौशाला में गाय-बछड़ों के लिए हरा चारा दान करें। (राशि स्वामी शुक्र के लिये)- सुगंधित फूल, पारिजात, औषधीय पौधे, गुलर, शतावरी का पौधा लगाएं।

मिथुन : उड़द के आटे की गोलियां बनाकर मछलियों के लिए तालाब या नदी में डालें।
(राशि स्वामी बुध के लिये)- मेहंदी, नागपवित्री, तुलसी लटजीरा।

कर्क : काले पत्थर के शिवलिंग पर कच्चे दूध से अभिषेक करें। नि:शक्तों को मीठे चावल खिलाएं। (राशि स्वामी चंद्र के लिये)- सफेद फूल वाले पौधे, गन्ना, सफेद चंदन का पौधरोपण करें।

सिंह : गरीबों को गेहूं दान करें। दुर्गा देवी का पूजन लाल फूलों से करें। (राशि स्वामी सूर्य के लिये)- आंकड़ा, नारियल, बादाम, लाल फूल वाले पौधे लगाए।

कन्या : तुलसी के 11 पौधे भेंट करें। बरगद के पेड़ में जल अर्पित करें और पेड़ के नीचे बाजरा बिखेर दें। (राशि स्वामी बुध के अनुसार)- मेहंदी, नागपवित्री, तुलसी लटजीरा का पौधा लगाएं।

तुला : शिव या हनुमान मंदिर में दर्शन करें। गरीब कन्याओं को दूध और दही का दान दें। (राशि स्वामी शुक्र के लिये)- सुगंधित फूल, पारिजात, औषधीय पौधे, गुलर, शतावरी का पौधा लगाएं।

वृश्चिक : पीपल के पेड़ में जल चढ़ाकर पूजन करें। शाम को दीप दान करें। (राशि ग्रह मंगल अनुसार)- पारस पीपल, लाल चंदन, केशर का पौधा लगाए।

धनु : दृष्टिहीन बालक को मीठा दूध पिलाएं। गरीब परिवार में चने की दाल या बेसन से बनी मिठाई दान करें। (राशि स्वामी गुरु के लिये)- पीपल, नागरमोथा, पीली हल्दी, नीम, विष्णुकांता के पौधे लगाए।

मकर : पक्षियों को बाजरा डालें। शनिदेव का पूजन नीले पुष्पों से करें। (राशि स्वामी शनि के अनुसार)- बरगद, पलाश, महुआ,आंवला, शमी, तगर का पौधा लगाएं।

कुंभ : बहते पानी में सवा पाव चावल और 2 नारियल प्रवाहित करें। शनि मंदिर के बाहर बैठे भिखारियों को भोजन करवाएं।
(राशि स्वामी शनि के अनुसार)- बरगद, पलाश, महुआ,आंवला, शमी, तगर का पौधा लगाएं।

मीन : मिट्टी के पात्र में शहद भरकर मंदिर में रखकर आएं। चीटियों की बांबी में आटा रखें। (राशि स्वामी गुरु के लिये)- पीपल, नागरमोथा, पीली हल्दी, नीम, विष्णुकांता के पौधे लगाए |
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*आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)*

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