वांग्मय क्षितिज की द्वितीय पाक्षिक साहित्यिक गोष्ठी  संपन्न ……

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जालंधर (हरीश शर्मा ) 02 मई

दो चरणों में होने वाली साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन दिनांक 30/4/22 को निर्धारित समय पर आरंभ किया गया जिसमें क्या भगवान भी गलती करते हैं  ? ‘ लघु कथा  सबके  आकर्षण का केन्द्र  बनी।वांग्मय क्षितिज एक साहित्यिक उपवन में उस समय वाह! वाह !की गूँज सुनाई दी जब रचनाकारा किरनजीत कौर जी ने अपनी मार्मिक लघु कथा सुनाई “क्या भगवान भी गलती करते हैं  ? “

दो चरणों में विभक्त गोष्ठी के प्रथम चरण में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया तत्पश्चात् लघुकथा गोष्ठी द्वितीय चरण में पढ़ी गई ।

काव्य गोष्ठी का कुशल मंच संचालन डॉ . ज्योति खन्ना ने किया ।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ भारती पूजन से डॉ.  क्षमा लाल गुप्ता जी ने किया ।सभी कवि कवयित्रियों द्वारा एक से बढ़कर एक स्वलिखित रचनाएँ पढ़ी गईं।

गतिशीलता का संबल लिए लहर की भाँति प्रवाहमयी धारा बनी यह काव्य गोष्ठी बिना रोक – टोक आगे बढ़ती रही । जहाँ नन्ही प्रितिका ने देश भक्ति कविता द्वारा सबका मन मोह लिया वहीं फूल चंद्र शर्मा जी की कविता श्रम के महत्व का बखान करती हुई श्रमिक दिवस को समर्पित रही । प्राची जी की कविता उन्मुक्त मन की स्वच्छंदता पर आधारित थी ।जीवन की अविरल गति सीमा पर आधारित डॉ. क्षमा लाल गुप्ता जी की कविता ‘लहर’ भव्य शब्द चयन का प्रतीक रही जबकि प्रेम से सराबोर करती डॉ .ज्योति खन्ना की कविता ‘ए,दोस्त कभी तो आ जाओ’ भी प्रशंसनीय रही ।

द्वितीय चरण लघु कथा में जहाँ सुमन बाला जी की कथा अंधी ममता तथा विभा कुमरिया जी की कथा ‘जागृति’ मार्मिक ,जीवंत कथाएँ व प्रशंसनीय कथाएँ रहीं वहीं किरनजीत  कौर जी की लघुकथा  सबकी वाह वाही बटोरने  में सफल रही ।क्या भगवान भी गलती करते हैं ?

कार्य क्रम के अंत में सभी रचनाओं पर स्वतंत्र परिचर्चा की गई। कार्य क्रम के अंत में विभा कुमरिया शर्मा जी द्वारा धन्यवाद प्रस्तुति दी गई ।मई माह की  प्रथम पाक्षिक गोष्ठी में फिर से मिलने की शुभाकांक्षा के बाद कल्याण मंत्र के उच्चारण के बाद गोष्ठी का समापन किया गया

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