
वकीलों के सम्मान और सुरक्षा के लिए देशभर की बार एसोसिएशनें एकजुट हों : रोहित गंभीर, एडवोकेटpunjabreflection@gmail.com
दिल्ली में वकीलों के साथ कथित दुर्व्यवहार की निंदा, जिला बार एसोसिएशन जालंधर और जॉइंट एक्शन कमेटी के रुख की सराहनाhttps://www.facebook.com/share/1DyXz7ebgr/
जालंधर, 12 अक्टूबर (राम पाल भगत)। दिल्ली में वकीलों, जिनमें महिला वकील और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल हैं, के साथ कथित धक्का-मुक्की और हिरासत में लिए जाने की घटनाओं पर जिला बार एसोसिएशन, जालंधर के पूर्व सचिव रोहित गंभीर, एडवोकेट ने कड़ी निंदा व्यक्त की है। उन्होंने इस मामले में जॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ बार एसोसिएशंस तथा जिला बार एसोसिएशन, जालंधर द्वारा अपनाए गए स्पष्ट और एकजुट रुख की सराहना करते हुए देशभर की बार एसोसिएशनों से वकीलों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए एक मंच पर आने की अपील की।
पंजाब रिफ्लैक्शन समाचार पत्र के वरिष्ठ संवाददाता राम पाल भगत से बातचीत करते हुए रोहित गंभीर ने कहा कि वकीलों के साथ किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार केवल कानूनी बिरादरी के सम्मान का विषय नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा और संवैधानिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। वकील संविधान की रक्षा करने, नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आम लोगों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्रता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ बार एसोसिएशंस द्वारा देशभर की बार एसोसिएशनों से इस घटना की निंदा करने और एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील एक सराहनीय कदम है। जिला बार एसोसिएशन, जालंधर ने भी इस मामले में मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए निष्पक्ष जांच करवाने तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने की मांग की है। मामले को धर्म, जाति या राजनीति से जोड़ना उचित नहीं रोहित गंभीर ने जोर देकर कहा कि इस मामले को किसी धर्म, जाति, राजनीतिक विचारधारा अथवा व्यक्तिगत मतभेद के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। यह मुद्दा कानून के शासन, संविधान की मर्यादा, नागरिकों के अधिकारों और वकीलों की पेशेवर गरिमा से संबंधित है। उन्होंने कहा कि जब न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों के अधिकारों और सम्मान का प्रश्न सामने आए, तो पूरी कानूनी बिरादरी को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से भी अपील की कि वह इस मामले में स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाए तथा संबंधित अधिकारियों के समक्ष मुद्दा उठाकर जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करे। उनके अनुसार, न्याय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई आवश्यक है।
रोहित गंभीर ने कहा कि जॉइंट एक्शन कमेटी के फैसले के अनुसार, यदि संबंधित अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और उचित कार्रवाई नहीं की जाती, तो कमेटी देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तथा ‘नो वर्क डे’ जैसे कदम उठाने पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी निर्णय को सामूहिक सहमति, कानूनी प्रक्रिया और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वकीलों की मांगों को प्रभावी ढंग से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने देश की सभी बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुटता प्रदर्शित करें और वकीलों के अधिकारों तथा उनकी सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करें।अंत में रोहित गंभीर ने कहा कि वकीलों के सम्मान की रक्षा करना वास्तव में न्याय तंत्र के सम्मान की रक्षा करना है। कानूनी बिरादरी की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और संविधान, न्याय तथा वकीलों की गरिमा की रक्षा के लिए सभी को मिलकर खड़ा होना होगा।



























